Study Forum अध्ययन मंच

Study Forum अध्ययन मंच 

अध्ययन मंच Study Forum अध्ययन एवं चर्चा मंच होगा जिसे अलग – अलग संदर्भो में अलग – अलग समझा जा सकता है. यहाँ हम ‘जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान’ (डाईट) जो कि स्कूल शिक्षा विभाग का जिला स्तरीय संस्थान है, जिसकी ज़िम्मेदारी जिला स्तर पर स्कूलों में गुणात्मक शिक्षा सुनिश्चित करना होता है, के सन्दर्भ में विशेष कर यहाँ अध्ययनरत डी. एड. के छात्राध्यापक तथा कार्यरत संकाय सदस्यों (व्याख्यातागण) में कुछ मूलभूत क्षमताओं के विकास के सन्दर्भ में चर्चा करेंगे.

वैसे तो इस संस्थान के संकाय सदस्य अध्ययन-अध्यापन का काम करते ही हैं. तभी तो वे संस्थान के छात्राध्यापकों का उचित मार्गदर्शन कर पाते हैं. इसी तरह छात्राध्यापक संस्थान में अध्ययन करने के लिए ही आते हैं तो जाहिर है वे भी अध्ययन करते ही होंगे मगर अनुभव एवं अवलोकन कुछ और ही कहानी कहते हैं. शिक्षकों के पठन आदतों पर किये गए एक अध्ययन के अनुसार 60 प्रतिशत शिक्षक ऐसे हैं जो बच्चों की एक भी किताब के बारे में नहीं जानते. वे व्यवासायिक उन्नति हेतु प्रकाशित किसी पत्र पत्रिकाओं के बारे में भी नहीं जानते.

यद्यपि वे इस बात को स्वीकारतें हैं कि इस तरह के अध्ययन से उनका अध्यापन कार्य प्रभावी बन सकता है. न पढ़ पाने को वे समय की कमी बताते हैं. बहरहाल हम ये मानकर चल सकते हैं की शिक्षकों में पठन आदतों की कमी है. राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा – 2005 में भी उल्लेख किया गया है- “यद्यपि 1960 के दशक से ही शिक्षकों की पेशेवर तैयारी को अत्यावश्यक माना जाता रहा है, लेकिन इसका जमीनी यथार्थ शोचनीय है.” जबकि हम कह सकते हैं कि किसी शिक्षक से जुड़ी पठन आदतें उन्हें एक अच्छा शिक्षक/पेशेवर शिक्षक बनने में मदद करती है. इन्हीं सब को ध्यान में रखकर डाईट में एक ऐसे कार्यक्रम (स्टडी फोरम) की शुरुआत की जा सकती है जिससे छात्राध्यापकों तथा संकाय सदस्यों दोनों में ही पठन आदतें विकसीत हों.

Study Forum अध्ययन मंच
Study Forum अध्ययन मंच

Study Forum अध्ययन मंच  के उद्देश्य

इस कार्यक्रम के उद्देश्यों को तीन अलग – अलग दृष्टी से देखा जा सकता है; पहला- छात्राध्यापकों की दृष्टी में, दूसरा संकाय सदस्यों के दृष्टी में तथा तीसरा संस्थान की दृष्टी में ।

छात्राध्यापकों के दृष्टीगत Study Forum अध्ययन मंच के उद्देश्य-

  1. छात्राध्यापकों को स्व-अध्ययन एवं स्वतंत्र चिंतन के लिए प्रेरित करना तथा अभिव्यक्ति के अवसर देना.
  2. उन्हें सूचनाओं एवं जानकारी से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना.
  3. उन्हें पेशेवर शिक्षक बनाने कि दिशा में ले जाना.
  4. स्कूल और समाज से जुड़े मुद्दों पर विचार के लिए प्रेरित करना.
  5. भाषाई क्षमता बढ़ाना.
  6. छात्राध्यापक ज्ञान को व्यक्तिगत अनुभव के रूप में समझे जो सीखने – सिखाने के साझे अनुभव के रूप में प्राप्त किया जा सकता है न कि पाठ्यपुस्तकों के बाह्य यथार्थ के रूप में.

संकाय सदस्यों के दृष्टीगत Study Forum अध्ययन मंच  के उद्देश्य-

  • उनके अध्यापन प्रक्रिया में मूलभूत परिवर्तन लाना अर्थात उनकी शिक्षण प्रक्रिया में व्याख्यान के स्थान पर चर्चा, विचार विमर्श, प्रस्तुति, संगोष्ठियों का ज्यादा से ज्यादा समावेश होना.
  • स्व-अध्ययन और शोध के लिए प्रेरित करना.

सम्पूर्ण संस्थान के दृष्टिगत Study Forum अध्ययन मंच के उद्देश्य- ये हो सकते हैं कि संस्थान प्रदेश के लिए एक उत्कृष्ट एवं पेशेवर शिक्षक बना सकें अर्थात संस्थान को सही मायने में शैक्षिक चरित्र में ढालना.

अध्ययन मंच में क्या होगा ?

इस अध्ययन – चर्चा मंच में किसी चुने हुए विषय पर छात्राध्यापकगण आपस में छोटे-छोटे समूहों में चर्चा एवं विचार विमर्श कर सकते हैं जिससे कि कक्षा के अन्य साथियों के साथ अपना अनुभवों को बाँटते हुए स्वयं के ज्ञान की रचना करने में मदद मिलेगी. छोटे समूहों में चर्चा के समय वे कुछ पठन सामग्री का अध्ययन भी कर सकते है. इसी तरह वे विषय से सम्बंधित तैयारी के लिए पुस्तकालय में अध्ययन भी करेंगे. कक्षा में बड़े समूहों में प्रस्तुति  के दौरान अन्य छात्राध्यापकगण प्रस्तुत कर रहे छात्राध्यापक तथा उसके समूह के सदस्यों से कुछ सवाल भी कर सकते हैं. इसका फ़ायदा यह होगा कि छात्राध्यापकों के विचारों में स्पष्टता आयेगी.

Study Forum अध्ययन मंच का संचालन कौन कर सकता है ?

फोरम का संचालन संस्थान में अध्ययनरत छात्राध्यापकगण स्वयं, संस्थान में कार्यरत संकाय सदस्यगण या कोई स्वतंत्र संस्था कर सकती है. (सभी मिल कर भी कर सकते हैं). हालांकि इस कार्यक्रम की शुरुआत किसी स्वतन्त्र संस्था द्वारा किया जाना कई मायनों में अच्छा साबित हो सकता है. ऐसी स्थिति में छात्राध्यापकों में अपने नियमित शिक्षकों के प्रति छिपा भय उनके स्वतंत्र अभिव्यक्ति में बाधा नहीं होगी. यद्यपि उनमे अभिव्यक्ति की क्षमता विकसित हुआ तभी मानना चाहिए जब वे प्रत्येक परिस्थिति में स्वयं को अभिव्यक्त कर सकें. यहाँ यह उल्लेखनीय है की संचालन चाहे जिस किसी के द्वारा हो उसे केवल सुविधादाता के रूप में ही अपनी भूमिका को सीमित रखना चाहिए.

यह संभव है कि आगे चलकर जब डाईट के संकाय सदस्य अपने रोज के अध्यापन के तरीकों में स्टडी फोरम जैसे कक्षा वातावरण को अपना लें तब छात्राध्यापक सभी के समक्ष अभिव्यक्ति में स्वाभाविक अनुभव करें जैसा कि उद्देश्यों में कहा गया है.

Study Forum अध्ययन मंच में छात्राध्यापकों के अलावा और कौन शामिल हो सकते हैं ?

यद्यपि यह विशुद्ध रूप से छात्राध्यापकों के लिए हो सकता है लेकिन हम इस कार्यक्रम के सभी उद्देश्यों को प्राप्त करना चाहते हैं तो इसमे संकाय सदस्यों को भी एक सहभागी बतौर शामिल होना चहिये. ताकि आगे चल कर वे भी अपनी कक्षा शिक्षण में स्टडी फोरम जैसे वातावरण के महत्त्व को समझ सकें.

चर्चा/अध्ययन/विचार विमर्श के लिए विषय क्या हो ?

छात्राध्यापकों को पेशेवर शिक्षक बनाना किसी संस्थान (डाईट) का एक मकसद है. इसे ध्यान में रखकर विषयों का चुनाव जरुर किया जाना चाहिए अर्थात विषय ऐसे हों जो प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से शाला समुदाय के मुद्दों से जुड़े हों. भले ही सामग्री का चुनाव किसी फिल्म का कथानक ही क्यों न हो. दुनियाभर में हो रहे शैक्षिक शोध भी इसमें चर्चा का विषय हो सकते हैं.

इसके लिए विषयों का चुनाव कौन करे ?

आदर्श स्थिति में तो विषयों का चुनाव छात्राध्यापकों को ही करना चाहिए, परन्तु डाईट के संकाय सदस्यों तथा कार्यक्रम के सुविधादाता की ओर से उन्हें मार्गदर्शन जरुर मिलनी चाहिए.

चर्चा के लिए सुझावात्मक विषय-

  • बच्चे कैसे सीखते हैं?
  • ५ वर्ष की बच्ची स्कूल आने के पहले क्या-क्या जानती है? तथा वो सब कैसे जानती है?
  • बच्चों की गलतियां बनाम सीखने की सीढियां
  • विविधता एक संसाधन
  • कौन भाषा कौन बोली?
  • शिक्षक का शिक्षा संबंधी दृष्टिकोण
  • शाला में अनुशासन के मायने.
  • खेल, क्रिकेट और प्रसिद्धि.
  • खेल और शिक्षा.
  • शाला और समुदाय.
  • ज्ञान.
  • स्थानीय परिवेश.
  • शिक्षा एक सामाजिक मुद्दा.
  • समय का प्रबंधन.
  • मुल्यान्कन और परीक्षा
  • पाठ्यक्रम पूरा करने के मायने. आदि आदि .

फोरम संचालन की आवश्यक दशाएं-

किसी संस्थान में विशेष कर जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में इस कार्यक्रम के नियमित संचालन के लिए निम्नांकित दशाएं आवश्यक होंगी-

  • संस्थान के सभी सदस्यों का कार्यक्रम के महत्त्व पर आम सहमती.
  • डाईट में बच्चों के लिए निर्धारित कालखंडों में स्टडी फोरम के लिए समय व अवधि का स्पष्ट निर्धारण
  • इस कार्यक्रम के लिए संस्थान में एक प्रभारी सुनिश्चित करना.
  • छात्राध्यापकों के अध्ययन के लिए पुस्तकालय की सुविधा.

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