नई शिक्षा नीति 2020 और आकलन

नई शिक्षा नीति 2020 और आकलन

भूमिका

नई शिक्षा नीति 2020 में आकलन के बारे में विस्तार से चर्चा की गई है तथा इस पर चर्चा करने के पहले यह अपेक्षा की गई है कि हम उन शिक्षा क्रम और शिक्षण शास्त्र  में बदलाव को पहले समझे जिन बदलावों को आकलन के माध्यम से प्राप्त करने पर ज़ोर दिया गया है। कहा गया है कि पूरी शिक्षा व्यवस्था को इस प्रकार पुनर्गठित करना होगा जिससे कि शिक्षा में रटने की प्रथा को समाप्त कर समझ आधारित शिक्षा विकसित हो सके। इसके लिए बच्चों को कैसे सीखा जाए पर क्षमतावर्धन करना होगा। तभी हम बच्चों में 21वीं सदी के जरूरी कौशलों और ज्ञान को विकसित करते हुए व्यक्ति में समग्रता ला सकेंगे।

आकलन

नई शिक्षा नीति 2020 में उल्लेखित शिक्षा क्रम और शिक्षा शास्त्र के बदलाव-

इस दस्तावेज़ में शिक्षा क्रम और शिक्षण शास्त्र में निम्नांकित बदलावों को रेखांकित किया गया है-

  • तार्किक चिंतन, सृजनात्मकता, सहयोग की भावना, टीम में काम करना, सामाजिक सरोकार और ज़िम्मेदारी का भाव और डिजिटल लिटरेसी को विकसित करने के लिए स्कूली शिक्षा की प्रक्रिया को बदलते हुए विषय वस्तुओं को नई दिशा देना।
  • समग्र, पूर्ण, विश्लेषण और तार्किक चिंतन को बढ़ावा देने के लिए विषयवस्तुओं को कम करना। जिससे कि अनुभव आधारित, विमर्श आधारित, विश्लेषण आधारित सीखने को सुनिश्चित किया जा सके।
  • एक्स्ट्रा करीकुलर, को-करीकुलर जैसी गतिविधियों को शिक्षा क्रम के रूप में देखना। जिसमें कला, हस्तकला, खेल, योग, नृत्य, संगीत, पेंटिंग आदि शामिल हो।
  • विषयों के चुनाव में लचिलापन देना, खासकर सेकेन्डरी स्तर पर।
  • विज्ञानों और कलाओं के बीच तथा अकादमिक एवं व्यावसायिक के बीच के कड़ा विभाजन को समाप्त करना।
  • मातृ भाषा / स्थानीय भाषा तथा बहू-भाषिकता को शिक्षा में जगह देना।
  • विज्ञान को दो भाषाओं में सीखने का अवसर देना।
  • बुनियादी स्तर पर ‘संवाद’ को भाषा शिक्षण में प्रोत्साहित करना।
  • विभिन्न भारतीय भाषाओं, कलाओं एवं संस्कृति को बढ़ावा देकर एक आनंददायी नागरिक विकसित करना।
  • कुछ और बदलाव को देखते 

  • वैज्ञानिक सोच और प्रमाण आधारित चिंतन को शिक्षा क्रम और शिक्षाशास्त्र में बढ़ावा देना।
  • सहयोग की भावना एवं सृजनशीलता को विकसित करने के लिए कला और सौंदर्य बोध को शिक्षा में स्थान देना।
  • मौखिक एवं लिखित संवाद को प्रोत्साहित करना क्योंकि ये दोनों ही रोज़मर्रा के जीवन में खासा महत्व रखता है।
  • रणनीति, तर्क और शब्द पहेली, मजेदार गणित के खेल के माध्यम से समस्या-समाधान और तार्किक चिंतन के कौशलों को बढ़ावा देना।
  • एक अच्छा इंसान बनने की दिशा में नीतिपरक और नैतिक चिंतन को स्थान देना। जैसे समानता, भाईचारा, क्षमा, शांति, ईमानदारी, राष्ट्र प्रेम आदि मूल्यों को विभिन्न विषयों में स्थान देना।
  • भारत का ज्ञान विशेषकर स्थानीय और आदिवासी ज्ञान व्यवस्थाओं को पाठ्यपुस्तकों एवं शिक्षा क्रम में शामिल करना।
  • और अंत में स्कूली शिक्षा की प्रक्रिया को इस तरह परिमार्जित करना कि बच्चों में संवैधानिक मूल्यों की समझ एवं इसे अमल में लाने के लिए जरूरी क्षमताओं का विकास करना।

परंपरागत / वर्तमान आकलन के दोष –

इसे निम्नांकित बिन्दुओं में व्यक्त किया जा सकता है –

  • बच्चों के लिए कोचिंग संस्कृति को बढ़ावा देना। विशेष कर सेकेन्डरी स्तर पर। क्योंकि इस समय युवा अपना कीमती समय बेहद प्रासंगिक एवं बेहतर ज्ञान प्राप्त करने में लगा सकते हैं।
  • चिंतन, विश्लेषण, रचनात्मकता जैसे कौशलों की जांच नहीं करता।
  • रटंत प्रणाली को बढ़ावा देता है।
  • बच्चों का समग्र विकास बाधित होता है। परीक्षा कुछ ही विषयों तक सीमित होकर रह जाता है।
  • सभी परीक्षाएँ एक तरह की समेटिव (योगात्मक) होती है। रचनात्मक (Formative) आकलन के लिए कोई जगह नहीं होता।
  • सीखने का आकलन होता है। सीखने के लिए आकलन और सीखने के रूप में आकलन अभ्यास में नहीं आ पाता। सभी का उद्देश्य परीक्षा में उच्चतम अंक प्राप्त करना हो जाता है।
नई शिक्षा नीति 2020 और आकलन –

उपरोक्त शिक्षाक्रमीय एवं शिक्षाशास्त्रीय बदलावों को अमल में लाने के लिए नई शिक्षा नीति 2020में आकलन के उद्देश्यों एवं तरीकों / प्रक्रियाओं पर नए सिरे से ध्यान दिलाया गया है। जिससे कि हमारी शिक्षा व्यवस्था में जो रटने की परंपरा गहरी पैठ बनाते जा रही है उसे समाप्त किया जा सके। वर्तमान में जिन अभिकरणों के द्वारा बच्चों का जो आकलन हो रहा है उनमें विभिन्न राज्यों के शिक्षा बोर्ड, अशासकीय संस्थाओं जैसे प्रथम (असर), NCERT द्वारा संचालित NAS (राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण) प्रमुख हैं। इन सभी अभिकरणों का एक विशिष्ट उद्देश्य होता है, जिससे बच्चों के ‘सीखने का आकलन’ तो होता है लेकिन सीधे तौर पर बच्चों को सीखने में मदद नहीं मिलती जबकि नई शिक्षा नीति 2020में बच्चों के सीखने के लिए आकलन एवं सीखने के रूप में आकलन को प्रोत्साहित करते हुए इसे शालाओं में स्थापित करने पर ज़ोर दिया गया है।    

आकलन के उद्देश्य हो –

  • बच्चों की कठिनाइयों को समझ कर सीखने में मदद करना और उनके विकास में मदद करना।
  • सीखने के लिए आकलन तथा सीखने के रूप में आकलन।
  • विश्लेषण, तार्किक चिंतन, अवधारणात्मक समझ, ज्ञान एवं रचनात्मक क्षमताओं को जाँचना।
  • शिक्षकों, बच्चों और सम्पूर्ण व्यवस्था को मदद करना।
नई शिक्षा नीति 2020 में उल्लेखित व्यवस्थाएँ-
  • एनसीईआरटी 2022 तक एक गाइड लाइन विकसित करेगा। जिसका पूरा फोकस सीखने के लिए आकलन पर होगा।
  • शिक्षण और सीखने की प्रक्रियाओं में सुधार के लिए फॉरमेटिव आकलन को प्रोत्साहित किया जाएगा।
  • प्रश्न बैंक ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएँगे जो उच्च स्तर का होगा।
  • सेकेन्डरी स्तर पर खुली-पुस्तक परीक्षा तथा पोर्ट फोलियो को भी आकलन के रूप में उपयोग होगा।
  • शिक्षक को अपनी शाला में परीक्षा से संबन्धित निर्णय लेने के मौके होंगे।
  • कक्षा 3, 5 और 8 में सेंसस परीक्षाएँ होंगी जो बच्चों के मूलभूत कौशलों की जांच करेगी न कि रटने की क्षमता का।
  • बोर्ड परीक्षाओं का पुनर्गठन बुनियादी अधिगम, कौशल और विश्लेषण की जांच के मद्देनजर की जावेगी।

निष्कर्ष –

अंत में यहाँ कहा जा सकता है कि नई शिक्षा नीति 2020और आकलन का सार यह है कि वर्तमान में प्रचलित आकलन के पिरामिड को बदलना ही आकलन का मुख्य उद्देश्य होगा।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और आकलन
नई राष्ट्रीय नीति 2020 में आकलन पर फोकस

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